दिवाली में वजन बढ़ने से कैसे बचें: मिठाई, नमकीन और देर रात के खाने के बीच आसान तरीके
छोटा जवाब
दिवाली में वजन इसलिए नहीं बढ़ता कि आपने एक दिन लड्डू खा लिए. वजन तब बढ़ता है जब त्योहार एक दिन का न रहकर दो-तीन हफ्ते का हो जाता है: धनतेरस से पहले की खरीदारी, ऑफिस की पार्टियां, रिश्तेदारों के घर, भाई दूज, और फिर घर में बचे मिठाई के डिब्बे जो हफ्तों तक खत्म नहीं होते. इस पूरे दौर में मिठाई, तले हुए नमकीन, देर रात का खाना, कम नींद और लगभग शून्य चलना फिरना एक साथ आ जाते हैं.
अच्छी खबर यह है कि इससे बचने के लिए मिठाई छोड़ने की ज़रूरत नहीं है. चार चीज़ें सबसे ज़्यादा फर्क डालती हैं: भूखे पेट मिठाई और नमकीन तक न पहुंचना, हर खाने में थोड़ा प्रोटीन रखना, दिन में चुनी हुई मिठाई खाना न कि डिब्बे से बार-बार, और रोज़ थोड़ा चलना. इस लेख में हम यही बातें आसान भाषा में, असली भारतीय घरों के हिसाब से समझेंगे.
ज़रूरी बात: यह लेख स्वस्थ बड़ों के लिए सामान्य जानकारी है. अगर आपको डायबिटीज़, थायरॉइड, दिल की बीमारी, किडनी की समस्या या कोई और बीमारी है, या आप गर्भवती हैं, तो खाने में बड़े बदलाव से पहले डॉक्टर से सलाह ज़रूर लें.
त्योहार में वजन असल में क्यों बढ़ता है
बहुत से लोग सोचते हैं कि दिवाली में बढ़ा वजन सिर्फ मिठाई की वजह से है. असल तस्वीर थोड़ी अलग है, और इसे समझ लेने से बचाव आसान हो जाता है.
छोटे-छोटे टुकड़े जो गिने नहीं जाते. सबसे ज़्यादा कैलोरी उन चीज़ों से आती है जिन्हें हम खाना मानते ही नहीं. मेहमान के साथ एक काजू कतली, चाय के साथ मुट्ठी भर नमकीन, किचन से गुज़रते हुए एक लड्डू, किसी के घर आधी प्लेट चकली. हर एक छोटा लगता है, लेकिन दिन के अंत तक ये मिलकर एक पूरे भोजन जितनी कैलोरी बन जाते हैं, और पेट भरने का एहसास लगभग नहीं देते.
देर रात का भारी खाना. पूजा और मेहमानों के बीच रात का खाना अक्सर दस-ग्यारह बजे तक खिसक जाता है. उसके बाद सीधे सो जाना पाचन के लिए भारी पड़ता है और अगले दिन सुबह भूख और ज़्यादा मीठा खाने की इच्छा दोनों बढ़ा देता है.
नींद की कमी. सफाई, सजावट, खरीदारी और पटाखों के बीच नींद पांच-छह घंटे पर आ जाती है. कम नींद अगले दिन भूख को बढ़ाती है और खास तौर पर मीठे और तले हुए खाने की तरफ खींचती है.
तराज़ू का धोखा. त्योहार के बाद तराज़ू पर जो एक-दो किलो दिखता है, उसका बड़ा हिस्सा पानी होता है. ज़्यादा नमक और ज़्यादा कार्ब्स शरीर में पानी रोक लेते हैं. यह सामान्य खाना शुरू होते ही चार-पांच दिन में उतर जाता है. असली चर्बी तब जमती है जब त्योहार वाला खाना लगातार दो-तीन हफ्ते तक चलता रहे. इसलिए असली लड़ाई दिवाली के दिन की नहीं, उसके आसपास के पूरे महीने की है.
दिवाली से पहले की तैयारी: सबसे आसान जीत यहीं है
ज़्यादातर लोग तब सोचना शुरू करते हैं जब मिठाई का डिब्बा सामने खुला होता है. उस समय इच्छाशक्ति कम और ललचाने वाली चीज़ें ज़्यादा होती हैं. कुछ फैसले पहले से ले लेना बहुत आसान रहता है.
रूटीन को पूरी तरह मत छोड़िए, छोटा कर दीजिए. अगर आप रोज़ 45 मिनट चलते थे और त्योहार में समय नहीं मिल रहा, तो रोज़ 15 मिनट तय कर लीजिए. शून्य से 15 मिनट का फर्क, 15 से 45 के फर्क से कहीं बड़ा है. आदत टूटती नहीं, बस छोटी हो जाती है, और त्योहार के बाद उसे बढ़ाना आसान रहता है.
मिठाई खरीदने से पहले मात्रा तय करें. घर के लोगों और आने वाले मेहमानों के हिसाब से अंदाज़ा लगाइए, फिर उससे थोड़ा कम खरीदिए. जो डिब्बे तोहफे में आएंगे, वे वैसे भी आएंगे. ज़्यादा मिठाई का मतलब है हफ्तों तक घर में रखी मिठाई, और यही असली वजन बढ़ाती है.
घर की बनी चीज़ों में छोटे बदलाव. अगर घर में नमकीन या मिठाई बनती है, तो कुछ चीज़ें भूनकर या एयर फ्रायर में बनाई जा सकती हैं, जैसे भुना चिवड़ा, भुने मखाने या बेक की हुई मठरी. मिठाई में चीनी एक चौथाई कम कर दें, ज़्यादातर लोगों को फर्क पता भी नहीं चलता. मिठाई का आकार छोटा रखें, क्योंकि लोग गिनती के हिसाब से खाते हैं, वजन के हिसाब से नहीं. ऐसी और मिठाइयों के आइडिया के लिए हमारा लेख वजन घटाते हुए खाने लायक हेल्दी भारतीय मिठाइयां देखें.
त्योहार के दिन: खाने का सही क्रम
दिवाली के दिन और उसके आसपास के दिनों में यह मायने नहीं रखता कि आप कितने अनुशासित हैं. मायने यह रखता है कि आपके दिन का ढांचा कैसा है.
दिन की शुरुआत प्रोटीन से करें. सुबह सिर्फ चाय और मिठाई या चाय और नमकीन से दिन शुरू करना पूरे दिन की भूख बिगाड़ देता है. नाश्ते में बेसन का चीला, अंडे, पनीर भुर्जी, स्प्राउट्स या दही के साथ पोहा जैसा कुछ रखें.
भूखे पेट किसी के घर न जाएं. रिश्तेदारों के घर या पार्टी में जाने से एक घंटा पहले एक कटोरी दही, भुने चने, एक फल के साथ मुट्ठी भर मूंगफली या पनीर के कुछ टुकड़े खा लें. भूख कंट्रोल में होगी तो वहां की प्लेट पर आप चुनकर खाएंगे, जो सामने आए वह नहीं.
मिठाई खाने के बाद, खाली पेट नहीं. एक ही मिठाई अगर दाल, सब्ज़ी और रोटी वाले खाने के बाद खाई जाए, तो खून में शुगर उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ती जितनी खाली पेट खाने पर बढ़ती है. इससे अगले एक-दो घंटे में फिर से मीठा खाने की इच्छा भी कम होती है.
"एक चुनो" का नियम. दिन में एक या दो मिठाई तय करें जो आपको सच में पसंद हैं. उसे एक प्लेट में रखकर, बैठकर, आराम से खाएं. सबसे ज़्यादा नुकसान डिब्बे से खड़े-खड़े एक-एक टुकड़ा उठाने से होता है, क्योंकि उसकी गिनती कभी नहीं होती.
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प्लेट का आधा हिस्सा सब्ज़ी या सलाद. त्योहार के खाने में पूरी, पुलाव, पनीर की भारी सब्ज़ी और दही बड़े सब एक साथ होते हैं. कुछ भी छोड़ने के बजाय प्लेट का आधा हिस्सा सलाद, रायता या सूखी सब्ज़ी से भरें, एक चौथाई में दाल या पनीर, और बाकी में पूरी या चावल. आप सब कुछ चखेंगे, बस मात्रा अपने आप ठीक रहेगी.
मीठे पेय से सावधान. ठंडाई, मीठी लस्सी, पैकेट वाले जूस और कोल्ड ड्रिंक बहुत चीनी देते हैं और पेट बिल्कुल नहीं भरते. इनकी जगह छाछ, बिना चीनी का नींबू पानी, नारियल पानी या सादा पानी रखें.
रात का खाना हल्का और जल्दी. जिस दिन शाम को मिठाई और नमकीन ज़्यादा हो चुकी हो, उस रात का खाना हल्का रखें, जैसे दाल और सब्ज़ी के साथ एक-दो रोटी, या खिचड़ी. अगर पूजा के कारण देर हो रही है, तो शाम सात बजे के आसपास कुछ हल्का खा लें ताकि ग्यारह बजे भूख से बेहाल न हों.